🔶संविधान सभा का निर्माण (Constitution Assembly in Hindi)
🔸पृष्ठभूमि (संविधान सभा की मांग )
• प्राचीनकाल में भारत में शासन संचालन का आधार धार्मिक ग्रंथ ( वेद, उपनिषद, नीति ) था। मौर्यकाल मेंसीअर्थशास्त्र' को आधार बनाया गया। ब्रिटिश काल में स्वतंत्रता की मांग के साथ संविधान व संविधान सभा की मांग उठने लगी।
• 1895 में ' The constitution of India Bill' ( स्वराज विधेयक) बाल गंगाधर तिलक द्वारा तैयार किया गया।
• 1915 में भारत के कानून का प्रारूप 'गौखले का राष्ट्रीय वसीयतनामा' तैयार किया गया किंतु लागू नहीं हुआ।
• 1916 में होमरूल लीग आंदोलन' के तहत घरेलू संचालन की मांग की गई।
• 5 Jan 1922 में महात्मा गाँधी ने एक साक्षात्कार के माध्यम से संविधान और संविधान सभा के निर्माण की मांग रखी।
• 1924 में मोतीलाल नेहरू ने केन्द्रीय विधान मंडल में प्रस्ताव रखा कि भारतीयों के लिए कानून बनाने में भारतीयों का प्रतिनिधि मण्डल हो ।
• अंग्रेजों की इच्छा के विरुद्ध यह प्रस्ताव पारित किया गया लेकिन गवर्नर जनरल ने स्वीकृति नहीं दी। यद्यपि यहकानून नहीं बन सका तथापि राष्ट्रीय मांग के रूप में प्रचलित इस घटना से उत्पन्न अशांति को दूर करने के लिएमुडीमैन समिति' का गठन किया गया।
• 1925 में The Commonwealth of India Bill ' के द्वारा ' एनी बेसेंट' के प्रयासों से भारत में सर्वदलीय सम्मेलन हुआ व भारत के लिए विस्तृत कानूनों का ड्राफ्ट तैयार हुआ। इस ड्राफ्ट को इंग्लैण्ड में लेबर पार्टी के सदस्यों के पास भेजा गया। लेवर पार्टी सांसद जॉर्ज लेंसबरी द्वारा इसे पेश किया गया था।
• 1928 में मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व में प्रमुख दलों के सदस्यों ने संविधान निर्माण किया जिसे नेहरू रिपोर्ट के नाम से जानते हैं जिसमें संघीय व्यवस्था, मूल अधिकार, अल्पसंख्यक हितों के प्रावधान किए गए। इससे असंतुष्ट होकर जिन्ना ने 14 सूत्रीय मांगे प्रस्तुत की
• 1934 में स्वराज पार्टी ने संविधान सभा की औपचारिक मांग की। 1934 में Congress Working Committee(CWC) की पटना बैठक में संविधान सभा की मांग को अपनी अधिकृत नीति में शामिल किया।
• 1934 में M.N. ROY ने संविधान सभा की औपचारिक रूप से मांग की।
• 1936 में कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन (नेहरू अध्यक्ष) में कांग्रेस ने ' व्यस्क मताधिकार' के द्वारा निर्वाचित संविधान सभा के गठन की मांग उठाई।
• 1938 के हरिपुरा अधिवेशन ( अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस ) ने कहा- "जब भी भारतीयों को आत्म निर्णय का अधिकार प्राप्त होगा तब ही भारतीयों की सभा भारत के लिए संविधान निर्माण करे। यही एकमात्र समाधान होगा।"
• 1939 में गाँधी जी ने कांग्रेस की संविधान सभा की मांग की पुष्टि की।
• गाँधी जी ने हरिजन' पत्रिका में लेख The Only Way' में लिखा- भारत का संविधान भारतीयों के मस्तिष्क कादर्पण है।
• 1940 में तत्कालीन वायसराय ' लार्ड लिनलिथगो' द्वारा ' अगस्त प्रस्ताव' की घोषणा की जिसमें युद्ध के उपरांत संविधान सभा के गठन की बात की ।
• 1942 में क्रिप्स मिशन में ब्रिटिश सरकार ने कुछ शर्तों के साथ संविधान को स्वीकार करने की बात कही।
◼️ क्रिप्स मिशन :
• दूसरे विश्व युद्ध (1939-45) के दौरान अमेरिका, रूस, चीन जैसे मित्र राष्ट्रों द्वारा ब्रिटेन पर यथाशीघ्र भारत का सहयोग प्राप्त करने का दबाव बनाया जा रहा था।
• महात्मा गाँधी इस युद्ध में ब्रिटेन के समर्थन के खिलाफ थे वहीं सरदार पटेल, सी. राजगोपालाचारी, मो. अली जिन्नाब्रिटेन के समर्थन में थे।
◼️ क्रिप्स मिशन के मुख्य प्रावधान :
• इसके अंतर्गत कहा गया कि युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन स्टेटस प्रदान किया जाएगा और भारत किसी भी घरेलू या बाहरी सत्ता के अधीन नहीं रहेगा।
• भारत राष्ट्रमंडल के साथ अपने संबंधों के निर्धारण में स्वतंत्र होगा तथा UN एवं अन्य अंतरर्राष्ट्रीय संस्थाओं मेंअपनी भूमिका को खुद ही निर्धारित करेगा।युद्ध समाप्त होने के बाद नए संविधान के निर्माण हेतु संविधान निर्मात्री परिषद का गठन किया जाएगा।
• इसके कुछ सदस्य प्रांतीय विधायिकाओं द्वारा निर्वाचित किये जायेगें तथा कुछ राजाओं द्वारा मनोनीत किए जायेंगे।इस दौरान भारत की रक्षा की जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार की रहेगी और गवर्नर जनरल की शक्तियाँ यथावत बनी रहेगी।
• ब्रिटिश सरकार, संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा बनाए गए नए संविधान को निम्नलिखित शर्तों के अधीन स्वीकार करेगी।
(i) संविधान निर्मात्री परिषद द्वारा बनाए गए संविधान को जिन प्रांतों को स्वीकार नहीं होगा वे भारतीय संघ से अलगहो सकते हैं तथा अपना संविधान भी बना सकते हैं। देशी रियासतों को भी इसी प्रकार का अधिकार होगा।
(ii) नवगठित संविधान निर्मात्री परिषद तथा ब्रिटिश सरकार सत्ता के हस्तांतरण तथा जातीय व धार्मिक अल्पसंख्यकोके हितों की रक्षा के मुद्दे को आपसी समझौते द्वारा हल करेगें।
🔹कांग्रेस की आपत्तिः
• क्रिप्स मिशन के अंतर्गत पूर्ण स्वतंत्रता के स्थान पर डोमिनियन स्टेटस प्रदान करने का प्रावधान किया गया था,इसलिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस मिशन को अस्वीकार कर दिया था।
• इसके अतिरिक्त भारतीय संघ में शामिल न होने वाले राज्यों को पृथक संविधान बनाने का अधिकार भी दिया गयाथा इसलिए भी कांग्रेस ने मिशन को स्वीकृति प्रदान नहीं की थी। महात्मा गाँधी ने इस मिशन को ' उत्तर दिनांकितचेक' (Post Dated cheque) कहा था।
🔹मुस्लिम लीग की आपत्तिः
• मुस्लिम लीग ने एक भारतीय संघ बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और उसने मो. अली जिन्ना के नेतृत्वमें खुलकर पृथक पाकिस्तान बनाने की बात कही। मिशन में भारत के विभाजन का स्पष्ट प्रावधान न होने के कारणमुस्लिम लीग ने भी इसे अस्वीकार कर दिया।
🔸कैबिनेट मिशन :
• वर्ष 1946 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री 'क्लीमेंट एटली' ने भारत में एक 3 सदस्यीय मंडल भेजा।
• अध्यक्ष - सर स्टेफर्ड क्रिप्स
• अन्य सदस्य - पैथिक लारेंस, ए. वी. एलेक्जेंडर
▪️ कैबिनेट मिशन उद्देश्य :
(i) संविधान सभा का गठन
(ii) भारत का विभाजन
(iii) संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रुप से होगा।
(iv) सभा का एक सदस्य 10 लाख जनसंख्या पर चुना जाएगा।
(v) संविधान सभा में कुल 389 सदस्य होंगे।