अक्षांश तथा देशान्तर पृथ्वी की सतह पर किसी भी स्थान की विशिष्ट स्थिति का निर्धारण करने में उपयोगी होते है।
• अक्षांश तथा देशान्तर मिलकर एक रेखा तंत्र का निर्माण करते हैं।
अक्षांश (Latitude) -
पृथ्वी के केन्द्र से विषुवत रेखा के सापेक्ष निश्चित कोणीय मान को अक्षांश कहते हैं।
समान कोणीय दूरी के अक्षांश बिन्दुओं को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को अक्षांश रेखा कहते हैं।
सभी अक्षांश एक दूसरे के समानान्तर होती है। इसलिए इन्हे Parallel of latitudes भी कहा जाता है।
अक्षांश रेखाओं की विशेषताएं -
① प्रत्येक अक्षांश रेखाएं पूर्ण वृत्ताकार होती है। जबकि दोनी ध्रुवीय अक्षांश बिन्दु के रूप में होते हैं।
② अक्षांश बिन्दुओं की संख्या 181 होती है। जबकि अक्षांश वृत्त रेखाओं की संख्या 179 होती है। क्योंकि 90° उत्तरी अक्षाश तथा 90° दक्षिणी अक्षांश बिन्दु के रूप में पाये जाते हैं।
(90 + 90 + विषुवत रेखा =181)
③ सभी अक्षांश रेखाएं एक दूसरे के समानात्तर होती हैं। लेकिन भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर निरन्तर छोटी होती जाती हैं।
④ विषुवत रेखा सबसे बड़ा वृत्त बनाती है। इसलिए इसे महान वृत्त (Great circa) भी कहते हैं।(लम्बाई- 40076 km)
⑤ 60° अक्षांश वृत्त विषुवत वृत्त का ठीक आधा होता है।
⑥ 75° अक्षांश वृत्त विषुवत वृत्त का 1/4 (एक चौथाई) होता है।
⑦ दो अक्षांश के मध्य सामान्यतः दूरी एक समान होती है। लेकिन वास्तविक रूप ध्रुवों की ओर दो अक्षाशों के मध्य दूरी बढ़ती है।
(विषुवत रेखा पर 1°= 110.5km, ध्रुवों पर 1°= 111.7 km)
*ऐसा होने का कारण ध्रुवों की ओर पृथ्वी का चपटापन तथा वक्रीयता में वृद्धि होना है।
• दो अक्षांश रेखाओं के मध्य के क्षेत्र को कटिबंध/Belt कहते हैं।
🔅 महत्वपूर्ण अक्षांश रेखाएं -
🔸कर्क रेखा - 23(1/2)° उत्तरी अक्षांश को कर्क रेखा कहते हैं।
🔸मकर रेखा - 23(1/2)° दक्षिणी अक्षांश को मकर रेखा कहते हैं।
🔸भूमध्य रेखा/विषुवत रेखा(Equator) - 0° अक्षांश को भूमध्य रेखा कहते हैं।
🔸आर्कटिक वृत - 66(1/2)° उत्तरी अक्षांश को आर्कटिक वृत कहते हैं।
🔸अंटार्कटिक वृत - 66(1/2)° दक्षिणी अक्षांश को अंटार्कटिक वृत कहते हैं।
🔹भारत का अक्षांशीय विस्तार -
भारत का अक्षांशीय विस्तार 8°4' से 37°6' (8 डीग्री 4 मिनट से 37 डीग्री 6 मिनट)
देशात्तर रेखाएँ (Longitudinal liner) / Meridians) -
उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली काल्पनिक रेखाएं जो पृथ्वी की सतह से होकर गुजरती हैं। देशात्तर रेखाएँ कहलाती हैं।
🔸प्रधान मध्यान्न रेखा के निर्धारण के लिए २२ अक्टूबर 1884 को वाशिंगटन डी० सी० में अत्तरर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें इस रेखा को लंदन में ग्रीनविच नामक स्थान पर स्थित ब्रिटिश शाही खगोलशाला से तय किया गया इसलिए इसे ग्रीन विच रेखा कहा जाता है।
देशात्तर रेखाओं की विशेषताएं →
① सभी देशात्तर रेखाएं अर्धवृत्ताकार होती हैं।
② देशात्तर रेखाओं की संख्या = 360 देशात्तर
③ देशांतर तथा प्रति देशात्तर मिलकर एक पूर्ण वृत्त बनाते हैं। (0° देशात्तर के ठीक विपरीत 180° देशात्तर होगा)
④ सभी देशांतर रेखाओं की लम्बाई एक समान होती है।
⑤ दो देशात्तरों के मध्य सर्वाधिक दूरी भूमध्य रेखा पर होती है। तथा ध्रुवों पर यह दूरी शून्य हो जाती है।
*भूमध्य रेखा पर दो देशात्तरों के मध्य की दूरी 1°=111.32km
*ध्रुवों पर दो देशात्तरों के मध्य की दूरी 1°= 0km
⑥ ग्रीनविच मानक समय रेखा 0° देशात्तर तथा 180° देशात्तर, दोनों उभयनिष्ठ रेखाएं होती है।
🔹भारत का देशांतरीय विस्तार -
महत्वपूर्ण देशांतर रेखाएं -
🔸180° देशात्तर - 180° देशात्तर को अत्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं।
🔸0° देशात्तर - 0° देशात्तर को ग्रीनविच मानक समय रेखा (GMT) कहते हैं, इसे प्रधान मध्यान्न रेखा या यामोत्तर रेखा भी कहते हैं।
• दो देशांतर रेखाओं को मध्य के क्षेत्र को गोर (Gore) कहते हैं।
FAQ -
1. अक्षांश और देशांतर क्या है
उत्तर - अक्षांश और देशांतर काल्पनिक रेखाऐं है जो पृथ्वी की सतह पर किसी भी स्थान की विशिष्ट स्थिति का निर्धारण करती हैं।
2. भारत का अक्षांशीय ओर देशांतरीय विस्तार कहा से कहा तक हैं।
उत्तर - अक्षांशीय विस्तार -
देशांतरीय विस्तार -
